हरिद्वार। मायापुर स्थित नारायणी शिला मंदिर में अमावस्या पर श्रद्धालु उमड़ पड़े। मंगलवार तड़के ही पूजा-अर्चना, पितरों का तर्पण और पिंडदान का क्रम शुरू हो गया, जो देर तक चलता रहा। उत्तराखंड के साथ ही यूपी, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा समेत विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पितरों की आत्मशांति और पितृ दोष निवारण के लिए विधि-विधान से अनुष्ठान कराए।
मुख्य पुजारी पंडित मनोज शास्त्री ने बताया कि अमावस्या का दिन पितृ तर्पण के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और विधि से किया गया श्राद्ध पितरों की कृपा दिलाता है और परिवार में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। श्रद्धालुओं ने दान-पुण्य करते हुए जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा भी दी। गणेश-परशुराम घाट भी पहुंचे श्रद्धालु नारायणी शिला मंदिर में भीड़ इतनी थी
कि कई श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में बैठकर पूजा-अर्चना करने का स्थान नहीं मिल सका। ऐसे में कई लोग गणेश घाट, ओम पुल के निकट और परशुराम घाट पर पहुंचकर तर्पण और कर्मकांड करते नजर आए। गंगाघाट पर भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें देखी गईं।