हरिद्वार। प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल की शहर इकाई और जागृति विचार मंच ने सोमवार को शासन-प्रशासन पर सवाल खड़े किए। प्रेसवार्ता में वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2025 तक देवभूमि को नशा मुक्त बनाने का दावा किया था, लेकिन अब 2026 भी आ गया और हालात यह हैं कि हरिद्वार तक नशामुक्त नहीं हो सका है। वक्ताओं ने कहा कि सूखा नशा बच्चों और युवाओं को बर्बाद कर रहा है, लेकिन अफसर इस ओर गंभीर नहीं दिखाई दे रहे हैं। सूचना देने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर जनता कब तक खामोश रहे।
युवा जागृति मंच की ओर से पहले भी अनशन किया गया था, जिसे आश्वासन देकर खत्म् कराया गया, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। व्यापारियों ने कहा कि नशे का काला कारोबार इस हद तक बढ़ चुका है कि माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर डरे हुए हैं। इस अवसर पर शहर व्यापार मंडल अध्यक्ष प्रवीण शर्मा, जाह्नवी मार्केट व्यापार मंडल की महिला अध्यक्ष निशा गुप्ता, अधीर कौशल, मनीष चौहान, विमल सक्सेना, योगेश भारद्वाज, आदेश मारवाड़ी, मयंक मूर्तिभट्ट, दीपक शर्मा सहित कई व्यापारी और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
पुलिस चौकी के सामने बिक रहा नशा व्यापारियों ने आरोप लगाया कि हरकी पैड़ी स्थित पुलिस चौकी के सामने जाह्नवी मार्केट में खुलेआम सूखा नशा बिक रहा है और यह इलाका चिंताजनक रूप से नशे का केंद्र बन चुका है। नशे के कारण धर्मनगरी की छवि धूमिल हो रही है। आए दिन सोशल मीडिया पर अवैध शराब और स्मैक पकड़े जाने के वीडियो वायरल होते हैं। नशे के खिलाफ बनाया जाए सख्त कानून व्यापारियों ने मांग उठाई कि नशे के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाए और प्रभावी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 से लगातार सूखा नशा बढ़ता जा रहा है और यह सब किसके संरक्षण में हो रहा है, यह बड़ा सवाल है। उत्तराखंड निर्माण के समय किसी ने ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं की थी।