हरिद्वार: धर्मनगरी में एक कहावत है ‘बहती गंगा कृपा बरसातीं हैं, ठहरीं तो देतीं हैं धन-दौलत’। यह चरितार्थ तब होता है जब गंगनहर की वार्षिक बंदी होती है। पानी की धारा बंद होते ही हजारों लोग गंगा में लक्ष्मी की तलाश में जुट जाते हैं। वही दृश्य बृहस्पतिवार देर रात से दिखने लगा। गंगा की अविरल धारा में अपने छोटे-छोटे कारोबार के जरिए साल भर की आजीविका का जुगाड़ करने वाले परिवार 15 दिन तक सपनों की दौलत तलाशते हैं।
हरिद्वार के हाईवे से लेकर कानपुर तक अपने-अपने जरूरत का समान गंगा की गोद में खोजते निआरिआ को कई बार बहुत कुछ मिल जाता है। निआरिया को इसमें उनकी जरूरत के सामान के साथ धन और संपदा भी मिलती है। साल के करीब 350 दिन मां गंगा जब बहती है तो श्रद्धालुओं को सुविधा देकर पैसा कमाते हैं। मोक्ष प्राप्त करने के लिए देश दुनिया के लोग हरिद्वार आते हैं। गंगा की अविरल धारा में स्नान दान और आरती करने वालों की यही कामना होती है कि उन्हें मां गंगा आशीर्वाद देंगी।