हरिद्वार। ब्रह्मलीन श्रीमज्जद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज की सातवीं पुण्यतिथि पर अखाड़ा परिषद से जुड़े सभी 13 अखाड़ों के संत-महापुरुषों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। भीमगोड़ा स्थित स्वामी जगन्नाथ धाम ट्रस्ट में महामंडलेश्वर स्वामी अरुण दास महाराज के संयोजन में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज ने कहा कि साकेतवासी स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज त्याग, तपस्या और सेवा की जीवंत प्रतिमूर्ति थे।
सनातन धर्म संस्कृति के संरक्षण और उन्नयन के साथ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण आंदोलन में उनका योगदान स्मरणीय रहेगा। उन्होंने कहा कि उनके परम शिष्य महामंडलेश्वर स्वामी अरुण दास महाराज जिस निष्ठा से गुरु परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं, वह प्रेरणास्रोत है। महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि परमार्थ के लिए जीवन समर्पित करने वाले संत केवल शरीर का त्याग करते हैं, उनकी आत्मा समाज का मार्गदर्शन करती है। स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज के विचार और शिक्षाएं सदैव समाज को दिशा देती रहेंगी।
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद महाराज ने कहा कि स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज महान आत्मा थे, जो संत समाज और भक्तों की स्मृतियों में सदैव जीवंत रहेंगे। उन्होंने सभी से उनके बताए मार्ग पर चलकर मानव कल्याण के कार्यों में योगदान देने का आह्वान किया। महामंडलेश्वर स्वामी अरुण दास महाराज ने कहा कि गुरु ही परमात्मा का दूसरा स्वरूप होते हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज जैसे प्रखर संत का सानिध्य प्राप्त हुआ।
श्रद्धांजलि सभा का संचालन स्वामी रविदेव शास्त्री ने किया। आश्रम ट्रस्ट के पदाधिकारियों द्वारा सभी संत महापुरुषों का पुष्पमालाओं से स्वागत किया गया। कार्यक्रम में महंत जसविंदर सिंह, महंत जयराम दास, महंत रामनौमी दास, महंत विष्णु दास, महंत रघुवीर दास, महंत ईश्वर दास, महंत नारायण दास पटवारी, महंत प्रकाशानंद, स्वामी ज्योर्तिमयानंद, स्वामी दिनेश दास, महंत प्रबोधानंद गिरी, महंत राघवेंद्र दास, महंत निर्भय सिंह सहित बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।