हरिद्वार। चर्चित बाघ शिकार मामले में फरार चल रहा मुख्य आरोपी आमिर हमजा उर्फ मियां आखिरकार सोमवार को कोर्ट में सरेंडर करने में सफल हो गया। सुबह करीब साढ़े दस बजे रोशनाबाद स्थित कोर्ट परिसर पहुंचे आमिर हमजा को पकड़ने के लिए पहले से तैनात वन विभाग की टीम सक्रिय हुई, लेकिन वकीलों और वनकर्मियों के बीच हुई तीखी नोकझोंक के बाद आरोपी ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। अब वन विभाग उससे पूछताछ के लिए रिमांड लेने की तैयारी में जुट गया है। श्यामपुर रेंज की सजनपुर बीट में दो बाघों की जहरीला पदार्थ खिलाकर हत्या किए जाने का मामला सामने आने के बाद से वन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा था।
जांच में सामने आया था कि बाघों के शव जंगल में पड़े मिले थे और उनके अंग भी काटे गए थे। मामले में अब तक आलम उर्फ फम्मी, आशिक, जुप्पी और यूसुफ को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि मुख्य आरोपी आमिर हमजा लगातार वन विभाग को चकमा दे रहा था। विभाग के अनुसार गिरफ्तारी से बचने के लिए हमजा ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सीजेएम कोर्ट में सरेंडर अर्जी दाखिल की थी। पिछले तीन दिनों से वन विभाग की टीम कोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में निगरानी कर रही थी। सोमवार सुबह जैसे ही आरोपी कोर्ट पहुंचा और एक अधिवक्ता के चैंबर में बैठा, वनकर्मियों को इसकी सूचना मिल गई।
टीम ने उसे हिरासत में लेने का प्रयास किया, लेकिन मौके पर मौजूद वकीलों ने इसका विरोध किया। काफी देर तक चले हंगामे के बाद आरोपी ने अदालत में सरेंडर कर दिया। वन विभाग के मुताबिक बाघ शिकार कांड की साजिश आमिर हमजा ने ही रची थी। आरोप है कि उसी ने मृत भैंस पर जहर लगाने की योजना बनाई और बाघों की मौत के बाद उनके पंजे काटे। मामले में अभी तक कई अहम साक्ष्य, जिनमें धारदार हथियार और कटे हुए अंग शामिल हैं, बरामद नहीं हो सके हैं। ऐसे में वन विभाग को उम्मीद है कि रिमांड मिलने के बाद पूछताछ में कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और उसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही थी। सोमवार को उसने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। वन विभाग की टीम ने वकील के चैंबर से ही आरोपी को पकड़ने का प्रयास किया था लेकिन विरोध के कारण के वनकर्मियों को पीछे हटना पड़ा। वन विभाग जल्द ही अदालत में रिमांड अर्जी दाखिल करेगा, ताकि पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और शिकार की साजिश का पर्दाफाश किया जा सके।