हरिद्वार: मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर आयुर्वेदिक कॉलेजों के प्रशिक्षु डॉक्टरों ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। 15 हजार रुपये के मौजूदा मानदेय को बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की मांग पर अड़े प्रशिक्षु डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। गुरुकुल आयुर्वेदिक कॉलेज और ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज के प्रशिक्षु डॉक्टरों का मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर धरना गुरुवार को भी जारी रहा। ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज के गेट पर बड़ी संख्या में प्रशिक्षु डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
बुधवार को आयुष मंत्री मदन कौशिक से मुलाकात के बावजूद मांग पर सहमति नहीं बनने से प्रशिक्षु डॉक्टरों में नाराजगी है। प्रशिक्षु डॉक्टर अदिति त्यागी ने बताया कि बीएएमएस करने के बाद छात्रों को एक साल डॉक्टर के तौर पर काम करना पड़ता है। चार साल फीस भरने के बाद उन्हें एक साल तक मिलने वाला मानदेय बहुत कम है। वो आयुर्वेद, ओपीडी और बड़े आयोजनों में अपनी सेवाएं देते हैं। इस एक साल में वो मानदेय पर ही निर्भर रहते हैं। महंगाई के दौर में महज 15 हजार मानदेय बहुत कम है।
सरकार से मांग:
धरना देते हुए तीन दिन हो गए हैं, सरकार के स्तर से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। उनकी मांग है कि जल्द से जल्द उनके मानदेय बढ़ाने का आदेश जारी किया जाना चाहिए। प्रशिक्षु डॉक्टर अभिषेक चौधरी ने कहा कि समान काम के बदले समान मानदेय मिलना चाहिए। जबकि कुंभ और कांवड़ जैसे आयोजनों में भी आयुर्वेद के डॉक्टर अपनी सहभागिता निभाते हैं। एक तरफ तो सरकार एलोपैथ और आयुर्वेद को एकसामन बताती है, दूसरी तरफ मानदेय में भेदभाव किया जा रहा है। उत्तराखंड और अन्य राज्यों में एलोपैथ के डॉक्टरों का मानदेय बढ़ा दिया गया लेकिन आयुर्वेद के डॉक्टरों का मानदेय नहीं बढ़ाया जा रहा है।
यदि जल्द ही उनकी 25 हजार रुपए प्रति महीना मानदेय की मांग को पूरा नहीं किया गया तो सभी प्रशिक्षु डॉक्टर मंत्री के आवास का घेराव कर बड़ा आंदोलन करेंगे। इस अवसर पर अनिरुद्ध, प्रियंका, प्रशांत, निखिल पंवार, अवंतिका, श्वेता सिंह,व्यानुधका, अभिषेक गुप्ता, दीपांश, इंदु, मयंक, तनु, गरिमा, शशांक, दीपशिखा, प्रीति, निताशा, समता, तुषार चौधरी, आरजू, ज्योति आदि उपस्थित रहे।
परिजन उठा रहे खर्च:
प्रशिक्षु डॉक्टर शिवानी तिवारी ने बताया कि वो हरिद्वार के जिला अस्पताल से लेकर सभी छोटे सरकारी अस्पतालों में सेवाएं प्रदान करते हैं लेकिन उन्हें बहुत कम मानदेय दिया जा रहा है। जो मानदेय मिलता है, उसे भी देने में छह महीने इंतजार करना पड़ता है। बताया कि साढ़े चार साल तक की पढ़ाई का खर्च उनके परिजन उठाते हैं। मानदेय शुरू होते ही वो भी अपने परिजनों का भार हल्का करना चाहते हैं। लेकिन इतने कम मानदेय में उनका ही खर्च पूरा नहीं होता तो परिवार के लिए कुछ नहीं कर पाते। सरकार से मांग है कि जल्द से जल्द उनका भी मानदेय बढ़ाया जाए।