मनरेगा जांच में संविदा परिचालक को मजदूर दिखाकर भुगतान, 19,754 रुपये लौटाए

हरिद्वार। विकासखंड नारसन की ग्राम पंचायत पीरपुरा में मनरेगा कार्यों की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। परिवहन विभाग के हरिद्वार डिपो में संविदा परिचालक के रूप में कार्यरत व्यक्ति को मनरेगा मजदूर दिखाकर भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद हुई जांच में संबंधित व्यक्ति ने 19,754 रुपये की पूरी राशि राजकोष में जमा कर दी। वहीं, लापरवाही पाए जाने पर ग्राम रोजगार सहायक और तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। लोकपाल मनरेगा बीएस नेगी ने बताया कि उप जिला कार्यक्रम समन्वयक एवं जिला विकास अधिकारी के माध्यम से प्राप्त शिकायत के आधार पर मामले की जांच कराई गई।शिकायतकर्ता फिरोज, अकिल, तौकिर, राशिद और इकबाल ने आरोप लगाया था कि ग्राम पंचायत पीरपुरा में तालाब की मिट्टी का अवैध विक्रय किया गया तथा मनरेगा में फर्जी भुगतान किए गए।

शिकायत में हरिद्वार डिपो में संविदा परिचालक के पद पर कार्यरत वसीम पुत्र इदरीश को मनरेगा मजदूर दर्शाकर मजदूरी का भुगतान करने का भी आरोप लगाया गया था। लोकपाल ने बताया कि 29 मई 2026 को स्थलीय निरीक्षण और अभिलेखों का सत्यापन कराया गया। तकनीकी जांच में लघु सिंचाई विभाग के अपर सहायक अभियंता अरविंद कुमार भास्कर ने सहयोग किया। जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं ने मनरेगा से बनी सड़कों की गुणवत्ता की जांच के लिए कोर कटिंग की मांग भी उठाई, लेकिन लोकपाल ने स्पष्ट किया कि मनरेगा के वार्षिक मास्टर सर्कुलर-2024 के अनुसार पांच लाख रुपये से कम लागत वाले कार्यों में कोर कटिंग का प्रावधान नहीं है। जांच में सभी कार्य इसी श्रेणी के पाए गए। जांच के दौरान वसीम ने स्वीकार किया कि उन्हें त्रुटिवश मनरेगा के तहत भुगतान हुआ था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 के बाद उन्होंने मनरेगा के अंतर्गत कोई कार्य नहीं किया और जांच के बाद प्राप्त 19,754 रुपये की पूरी राशि खंड विकास अधिकारी, नारसन के कार्यालय में राजकोष में जमा करा दी।

उन्होंने भविष्य में ऐसी गलती नहीं होने का आश्वासन भी दिया। लोकपाल ने अपने आदेश में कहा कि जिस अवधि में वसीम परिवहन विभाग में संविदा परिचालक के रूप में कार्यरत थे, उसी दौरान उन्हें मनरेगा मजदूर दिखाकर भुगतान किया गया। यह ग्राम पंचायत स्तर पर अभिलेखों के सत्यापन और जिम्मेदार अधिकारियों की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। मामले में दोषी पाए जाने पर ग्राम रोजगार सहायक पर गलत मस्टर रोल में उपस्थिति दर्ज करने और गलत भुगतान की संस्तुति करने के लिए एक हजार रुपये तथा तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी पर भी एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही खंड विकास अधिकारी नारसन को दंडादेश का नियमानुसार अनुपालन सुनिश्चित कर निर्धारित समय में आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

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