नाले के अधूरे निर्माण काम से लोग परेशान, प्रदर्शन किया

हरिद्वार। ज्वालापुर विस क्षेत्र के वार्ड-35 कड़च्छ में बड़े नाले का पुनर्निर्माण पिछले पांच महीनों से अधूरा पड़ा है। ग्रामीण निर्माण विभाग की कार्यदायी संस्था और ठेकेदार ने सड़क तोड़कर काम शुरू तो किया, लेकिन बीच में ही छोड़ दिया। नतीजा यह है कि आज पूरा इलाका परेशानी, गुस्से और असुरक्षा के साए में जी रहा है। इससे नाराज स्थानीय लोगों ने रविवार को प्रदर्शन किया। उनके अनुसार, टूटी सड़क, खुला नाला और चारों ओर बिखरा मलबा, यही आज कड़च्छ की पहचान बन गई है। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं। कई लोग गिरकर घायल भी हो चुके हैं, जबकि वाहन घरों तक पहुंचना लगभग बंद हो गया है।

लोगों का कहना है कि अंसारी मार्केट से कड़च्छ तक नाले की टेपिंग करीब एक साल पहले पूरी हो गई थी, लेकिन कड़च्छ मोहल्ले में नाले का सुदृढ़ीकरण से लटका हुआ है। जेसीबी से खुदाई के दौरान नाले के किनारे बने कई मकान पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। आंबेडकर मूर्ति के पास सड़क तोड़ने के बाद कार्यदायी संस्था निर्माण करना ही भूल गई। प्रदर्शनकारियों ने चेताया कि जब तक नाले का निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा। इस दौरान सुखलाल, रमेश कुमार, बलजीत, रविंद्र कुमार, मुकेश कुमार, पूरण सिंह, बबलू, मंजीत सिंह, अजीत, चंद्रभान, मोहित कुमार, यशपाल, मधुकांत, विशाल शामिल रहे।

नाले के निर्माण में राजनीति का आरोप आक्रोशित लोगों ने राजनीतिक द्वेष के चलते निर्माण रुकवाने का आरोप लगाया। पार्षद अंजू देवी ने कहा कि राजनीतिक कारणों से जानबूझकर धीमी गति से नाला बनाया जा रहा है। नगर निगम और ग्रामीण निर्माण विभाग में शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। लगभग 90 मीटर नाले का निर्माण और टेपिंग बाकी है। डीएम दफ्तर घेरने की चेतावनी वार्ड-33 शास्त्रीनगर के पार्षद सुनील कुमार ने चेताया कि जनता का शोषण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि नाले के निर्माण की मांग शीघ्र पूरी नहीं हुई, तो स्थानीय लोगों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया जाएगा। शासन से मांगी गई है अनुमति ग्रामीण निर्माण विभाग (आरईएस) के अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार ने बताया कि नाले का निर्धारित निर्माण पूरा किया जा चुका है। अब अलग से 90 मीटर अतिरिक्त नाले के निर्माण की मांग सामने आई है। इसका आकलन करते हुए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अनुमति मिलते ही निर्माण शुरू कराया जाएगा।

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