बजट सत्र तीन हफ्ते चलाएं, तभी होगी सार्थक बहस: कांग्रेस

हरिद्वार: आगामी बजट सत्र से पहले उत्तराखंड की सियासत में हलचल तेज हो गई है। हरिद्वार से जुड़े कांग्रेस विधायकों ने शुक्रवार को जिला प्रशासन के जरिये मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर विधानसभा के बजट सत्र की अवधि कम से कम तीन सप्ताह तक बढ़ाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि सभी सार्थक बहस हो सकेगी। विधायकों का कहना है कि बजट सत्र की सीमित अवधि के कारण जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर न तो पर्याप्त चर्चा हो पाती है और न ही सरकार से ठोस जवाबदेही सुनिश्चित हो पाती है।

विधायक रवि बहादुर ने कहा कि दूसरे राज्यों की तुलना में उत्तराखंड में विधानसभा सत्र अपेक्षाकृत कम समय तक चलता है। 70 विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं प्रभावी ढंग से उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल और विधायी कार्यों के लिए पर्याप्त समय तय किया जाए, ताकि लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप गंभीर और विस्तृत बहस हो सके। कानून-व्यवस्था से लेकर जल संकट तक चर्चा हो इस ज्ञापन में विधायकों ने कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, वन्यजीव हमले, पेयजल संकट और आपदा पीड़ितों के पुनर्वास जैसे मुद्दों को तत्काल चर्चा योग्य बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि ‘हर घर नल’ जैसी योजनाओं के बावजूद कई क्षेत्रों में पेयजल समस्या बरकरार है। पिछले वर्ष की आपदा से प्रभावित परिवार अब भी मुआवजे और पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं। यूपी के समय से लागू कानून बदले जाएं कांग्रेस विधायकों ने यह भी कहा कि उत्तराखंड में आज भी उत्तर प्रदेश काल के कई कानून लागू हैं, जिनको अब वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित किया जाना आवश्यक है। राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी लंबित विधायी सुधारों को बजट सत्र में प्राथमिकता से लाने की मांग की गई है। इस दौरान विधायक हाजी फुरकान अहमद, ममता राकेश, अनुपमा रावत समेत कई मौजूद रहे।

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