हरिद्वार। कुंभ में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और turistas का स्वागत अब वेलकम की जगह ‘स्वागतम्’ और अन्य संस्कृत शब्दों-श्लोकों से किया जाएगा। हरिद्वार और ऋषिकेश को संस्कृत नगरी के रूप में विकसित करने की तैयारी है। रेलवे स्टेशन से लेकर बस अड्डों, टैक्सी और ऑटो सेवाओं से जुड़े लोगों को संस्कृत भाषा का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि तीर्थनगरी पहुंचने वाले यात्रियों को उत्तराखंड की प्राचीन संस्कृति और भाषा का एहसास हो सके। इस पहल के लिए मेला प्रशासन ने उत्तराखंड संस्कृत संस्थान को 50 लाख रुपये के बजट का प्रावधान किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत कुंभ जैसे वैश्विक धार्मिक आयोजन में संस्कृत के अधिकाधिक प्रयोग की योजना बनाई गई है। इसके तहत हरिद्वार और ऋषिकेश में जगह-जगह संस्कृत के शब्दों, वाक्यों और श्लोकों के माध्यम से श्रद्धालुओं का स्वागत किया जाएगा। रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और परिवहन सेवाओं से जुड़े कर्मचारी यात्रियों से बातचीत में संस्कृत के सामान्य शब्दों और वाक्यों का प्रयोग करेंगे। उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के सचिव प्रो. विनय कुमार विद्यालंकार ने बताया कि संस्थान जल्द ही 100 से अधिक लोगों को संस्कृत भाषा का प्रशिक्षण देगा।
इसमें रेलवे स्टेशन के कुली, ऑटो चालक, टैक्सी चालक, बस कंडक्टर सहित आम लोगों को शामिल किया जाएगा। प्रशिक्षण में यात्रियों के साथ बातचीत के दौरान उपयोग किए जाने वाले सामान्य संस्कृत शब्दों और वाक्यों का अभ्यास कराया जाएगा। अलग-अलग वर्गों के लोगों को हर माह प्रशिक्षण देने की योजना है। अपर कुंभ मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने बताया कि कुंभ में संस्कृत के अधिकाधिक प्रयोग से उत्तराखंड की प्राचीन संस्कृति और भाषा का संदेश देश-दुनिया तक पहुंचेगा। इसके लिए उत्तराखंड संस्कृत संस्थान को 50 लाख रुपये का बजट दिया गया है।
सबसे पहले कुलियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण संस्कृत में यात्रियों का स्वागत करने की पहल की शुरुआत हरिद्वार रेलवे स्टेशन के कुलियों से की जाएगी। कुली संगठन ने भी इस पहल का स्वागत किया है। संगठन के अध्यक्ष किशन सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से शुरू किए जा रहे अभियान के तहत कुली संस्कृत भाषा के सामान्य शब्द और वाक्य सीखेंगे। हरिद्वार पहुंचने वाले यात्रियों का ‘स्वागतम्’ कहकर स्वागत करने का प्रयास किया जाएगा।