पेंशनर्स की एकता जरूरी, 2040 के बाद ढूंढने से भी नहीं मिलेंगे पेंशनर: भट्ट

हरिद्वार। पूर्व आईएएस अफसर चंद्रशेखर भट्ट ने कहा है कि देश में पेंशनर्स की संख्या लगातार घटती रही है। वर्ष 2040 के बाद ऐसी स्थिति भी आ सकती है कि पेंशनर्स ढूंढने से भी नहीं मिलेंगे। इसलिए, पेंशनर्स की एकता और संगठन पहले से अधिक जरूरी हो गया है। वे रविवार को ऋषिकुल ऑडिटोरियम में गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन (जीपीडब्ल्यूओ) के रजत जयंती महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि राजशाही काल में सेवकों की आर्थिक सुरक्षा के लिए पेंशन व्यवस्था शुरू की गई थी, पर समय के साथ इसके स्वरूप में बदलाव किया जाता रहा।

उन्होंने पेंशनर्स से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और संगठित रहने का आह्वान किया। अति विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड आयुर्वेद विवि के पूर्व कुलपति प्रो. सुनील कुमार जोशी ने कहा कि बढ़ती उम्र में आपसी मेलजोल, सामाजिक सक्रियता और संगठनात्मक गतिविधियां बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं। उत्तराखंड संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय ने राष्ट्र और समाज निर्माण में पेंशनर्स की महत्वपूर्ण भूमिका को बताया। जिलाध्यक्ष बीपी चौहान की अध्यक्षता, महामंत्री जेपी चाहर और प्रकाश जोशी के संयुक्त संचालन में आयोजित इस महोत्सव में विभिन्न जिलों से पहुंचे वक्ताओं ने सेवानिवृत्ति के बाद भी पेंशनर्स की सामाजिक और राष्ट्रीय विकास में उपयोगिता पर जोर दिया।

दूसरे सत्र में फूलों की होली के साथ समापन हुआ। इस दौरान एमपी सिंह गोयल, मिट्ठन लाल शर्मा, अतर सिंह, वीके गुप्ता, ओपी तिवारी, एमके अग्रवाल, बीपी सिंह सैनी, सुखवंश सिंह और आरडी अग्रवाल सहित कई सदस्य पहुंचे।गोल्डन कार्ड से जुड़ीं समस्याएं उठाईंइस अवसर पर महामंत्री जेपी चाहर ने 11 सूत्रीय मांगपत्र भी रखा। उन्होंने आठवें वेतन आयोग की ओर से पेंशन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर नजर बनाए रखने की जरूरत बताई। गोल्डन कार्ड से जुड़ी समस्याएं, नोशनल इंक्रीमेंट और पेंशनर्स दिवस जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई। सेवानिवृत्त अर्थ संख्याधिकारी आरके जोशी की संपादित ‘सेकेंड इनिंग’ स्मारिका का विमोचन भी किया गया।

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