हरिद्वार। श्रीबनखंडी साधुबेला पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी गौरीशंकर दास ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा चिंतन से चिंता की निवृत्ति का माध्यम है। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति में उत्तम चरित्र का निर्माण होता है। वह स्वयं को सबल बनाकर अपने कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
उन्होंने भूपतवाला के साधुबेला आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालु भक्तों को संबोधित किया। कहा कि कथा की सार्थकता तभी है कि जब हम इसमें निहित ज्ञान को अपने जीवन में उतारकर उसे व्यवहार में शामिल करें। जन्म जन्मांतर के पुण्य उदय होने पर ही श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण का सौभाग्य व्यक्ति को प्राप्त होता है।