हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विवि की पहल पर हरकी पैड़ी में पहली बार आयोजित संस्कृत कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों ने देर रात तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। यह आयोजन साहित्य अकादमी नई दिल्ली और श्री गंगा सभा हरिद्वार के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। रविवार को कवि सम्मेलन की शुरुआत मां गंगा की स्तुति से हुई।
जयपुर से आई युवा कवयित्री संस्कृति चतुर्वेदी ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं का ध्यान खींचा। बागपत के डॉ. अरविंद तिवारी, देहरादून के प्रो. रामविनय सिंह और डॉ. शशिकांत तिवारी ‘शशिधर’ ने अपनी रचनाओं से वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के पूर्व कुलपति डॉ. राधावल्लभ त्रिपाठी और पद्मश्री डॉ. अभिराज राजेन्द्र मिश्र की कविताओं ने देशभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का संदेश दिया।
कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय ने बसंत और ग्रामीण जीवन पर आधारित काव्य प्रस्तुत किया। डॉ. हरेकृष्ण शतपथी की रचनाओं ने भी श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने पर जोर दिया। आखिर में कुलसचिव दिनेश कुमार ने सबका आभार जताया।