हरिद्वार। सकल जग तारिणी हे छठी मईया, सभक शुभकारिणी हे छठी मईया, जल, थल वायु, अगिनि में अहीं छीं, अहीं छीं जग के आधार, सकल जग तारिणि हे छठी मईया..। बरती पुकारे देव, दुनो करजोरिया, अरघ के बेरिया हो..। सुनीं ना अरज हमार, हे छठी मईया…। जैसे गीतों के साथ व्रतियों ने लोक आस्था के महापर्व छठ के दूसरे दिन बुधवार को खरना (लोहंडा) की पूजा की।
हरिद्वार में सूर्यास्त के बाद व्रतियों ने गुड़ से बनी खीर और रसियाव (रोटी) का भोग लगाकर खरना का प्रसाद ग्रहण किया। इसके साथ ही व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो गया। गुरुवार शाम व्रती घर और घाटों पर डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य देकर सूर्य की उपासना करेंगे। आठ नवंबर यानी शुक्रवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ पूजा की समाप्ति होगी।
इसके बाद व्रती पारण करेंगे। खरना को लेकर छठ व्रतियों में खासा उत्साह था। सूर्यास्त होने पर व्रतियों ने स्नान कर खरना की पूजा की और गुड़ की खीर और रसियाव का भोग लगाया।